मन सम्बंधी तप
मन सम्बंधी तप
कबीर साहिब जी ने बताया है की मन संबंधी तप यानी कोई व्यक्ति आपको गलत बोलता है गाली गलौज करता है अनाप-शनाप बोलता है तो गुरु जी के ज्ञान आधार से आपका फर्ज बनता है कि आप शांत रहें।
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साकटऔर स्वान को उल्ट जवाब ना देय
हमारे गुरुजी संत रामपाल जी महाराज अपनी सत्संग में कई बार उदाहरण देकर समझाते हैं कि जब आप रास्ते से गुजरते हो और कोई कुत्ता आपको भोक्ता है अगर आप उसको रोकने की कोशिश करते हो तो ज्यादा भोंकता है जब आप चुप हो जाते हो उसको कुछ नहीं कहते हो तो वह थोड़ी देर बाद भोकना बंद हो जाता है ।
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हमारे गुरुजी संत रामपाल जी महाराज अपनी सत्संग में कई बार उदाहरण देकर समझाते हैं कि जब आप रास्ते से गुजरते हो और कोई कुत्ता आपको भोक्ता है अगर आप उसको रोकने की कोशिश करते हो तो ज्यादा भोंकता है जब आप चुप हो जाते हो उसको कुछ नहीं कहते हो तो वह थोड़ी देर बाद भोकना बंद हो जाता है ।
इसी प्रकार जब हम परमात्मा के प्रचार में पुस्तक सेवा करते हैं या किसी को कबीर जी की सत भक्ति वे उनके ज्ञान को समझाते हैं तो वह हमारे से झगड़ा करने लगता है तथा गाली निकालता है। हमारे गुरु जी को गलत बोलता है ।
उस समय गुरु जी के द्वारा बताई गई बातें याद आ जाती है तथा गीता में भी तब के बारे में बताया है और हम चुप हो जाते हैं अगले को कुछ नहीं बोलते हैं। अपने मन को समझाते हैं कि यह तो अज्ञानी है इसको ज्ञान नहीं है। उस दौरान आपके मन को जो कष्ट होता है, मन को जो ठेस पहुंचती है, उसको आप सहन करते हो अपने भगवान और गुरु के लिए।
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संयम:-
इसी प्रकार यदि साकट
यानि दुष्ट व्यक्तिको उत्तर दोगे तो और अधिक बकवास करेगा। इसलिए अपने मन को समझाकर संयम बरतना मनसंबंधी तप कहा है। गीता भी यही कहती है
विशेष:-
मन संबंधी तप वाला गुण ,पूर्ण गुरु से उपदेश लेकर और कबीर जी की सत भक्ति मर्यादा में रहकर करने से आता है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण आप वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज के भक्तों में देख सकते हैं।
संत रामपाल जी महाराज ,सारा ज्ञान कबीर जी के द्वारा बताया गया ज्ञान ही बताते हैं ।
गरीब
ऐसा निर्मल ज्ञान है,निर्मल करे शरीर।
और ज्ञान मंडलीक है,चकवे ज्ञान कबीर।।
आधीनी और बंदगी:-
जहां आधिनी है वहां पूर्ण दयाल साथ में है जिसके हृदय साथ वाके हृदय आप।
यानी जिसके हृदय में सच होता है उसके हृदय में परमात्मा कबीर साहिब जी का निवास होता है।
गरीब
अनन्त कोटि ब्रह्मा हुए,अनन्त कोटि हुए ईश।
साहिब तेरी बन्दगी से, जीव हो जावे जगदीश।।
सुमिरन का अर्थ है:- परमात्मा के सत मंत्र का जाप करना
सत मंत्र के जाप से पाप कर्म कट जाते हैं पुण्य कर्म बढ़ जाते हैं हृदय निर्मल हो जाता है और उस जीव पर परमात्मा की विशेष कृपा हो जाती है परमात्मा उस भगत से दूर नहीं रहते हैं यह वाणी भी कह रही है👇👇👇
गरीब अगम अनाहद भूमि है, जहां नाम का दीप।
एक पलक बिछुरे नहीं, रहता नैनो बीच।।
Mukti_Both
समाधान:-
आप भी इन बातों का समाधान चाहते हैं पूर्ण गुरु से कबीर जी के सत मंत्र लेना चाहते हैं तो साधना टीवी शाम को 7:30 से 8:30 बजे तक देखें और हमारी वेबसाइट पर विजिट करें
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Shi baat hai👌
ReplyDeleteVery nice sir
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteVery Nice
ReplyDeleteबिल्कुल गलत लिखा है कुछ भी लिख देते हो आप लोग
ReplyDeleteबिल्कुल सही
ReplyDeleteNice
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