Who is God? Kabir is God.
कबीर साहेब ही भगवान है इसका एक जगह नहीं बहुत जगह इसका प्रमाण है की कबीर साहेब भगवान है।
गीता
गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में भी प्रमाण है। गीता में लिखा हुआ है 17 श्लोक में की उत्तम पुरुष तो अन्य ही है जो तीनों लोकों में प्रवेश करके सबका धारण पोषण करता है । वह कोई और नहीं बल्कि कबीर साहेब भी है उत्तम पुरुष।
भावार्थ है कि पूर्णब्रह्म का शरीर का नाम कबीर (कविर देव) है।
4 अध्याय श्लोक 34 :- गीता जी में कहां है कि अर्जुन तत्वदर्शी संत की खोज करो।। तत्वदर्शी संत आपको बताएगा कि भगवान (who is God) कौन है।
क्या कबीर भगवान ,श शरीर है
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उस कबीर कबीर परमेश्वर का शरीर नूर तत्व से बना है।परमात्मा का शरीर अति सूक्ष्म है जो उस साधक को दिखाई देता है जिसकी दिव्य दृष्टि खुल चुकी है।
क्या जीव का भी शरीर है ?
इस प्रकार जीव का भी सूक्ष्म शरीर है जिसके ऊपर पाँच तत्व का खोल (कवर) अर्थात पाँच तत्व की काया चढ़ी होती है जो माता-पिता के संयोग से (शुक्रम) वीर्य से बनी है।
शरीर त्यागने के बाद के बाद जीव कहां जाता है ?
शरीरत्यागने के पश्चात् जीव जिस भी योनी में जाता है। जीव का सूक्ष्म शरीर साथ रहता है। वह शरीर उसी साधक को दिखाई देता है जिसकी दिव्य दृष्टि खुल चुकी है। इस प्रकार परमात्मा व जीव की साकार स्थिति समझे ।
कबीर परमात्मा की प्राप्ति में काल भी सहयोगी है
अध्याय 14 के श्लोक 27 में ब्रह्म काल कह रहा है कि पूर्ण परमात्मा के अविनाशी अमृत का
तथा शाश्वत् धर्म का और एकान्तिक सुख की पहली अवस्था (प्रतिष्ठा) मैं ही हूँ। यह काल ही
सत्यनाम उपासक भक्त को पार होने के लिए अपना सिर झुका कर रास्ता देता है। तब कबीर हंस
काल ने यह भी कबीर साहेब से कहा है कि - ‘‘जो भी
भक्त होवै तुम्हारा। मम सिर पग दे होवै पारा।।‘‘
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